Back Cover
Look Inside

कुल्लियाते-सुहैल से एक इन्तिख़ाब Kulliyat-e-Suhail se ek intekhaab (Hindi Transliteration)

इक़बाल अहमद ख़ाँ सुहैल 1884 में आज़मगढ़ के बढ़रिया नामी गाँव में पैदा हुए। इब्तिदाई तालीम ख़लीलुर्रहमान आज़मी के वालिद मदरसतुल-इस्लाह के संस्थापक से हासिल की। क्वींस कॉलेज बनारस से B.A. और अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी से M.A. और L.L.B. की तालीम हासिल की, जहाँ आपके डॉ. ज़ाकिर हुसैन ख़ाँ और रशीद अहमद सिद्दीक़ी से गहरे ताल्लुक़ात हो गए। आज़मगढ़ में वकालत का पेशा अपना लिया। आप आला दर्जे के उर्दू और फ़ारसी के शायर और अदीब (साहित्यकार) थे। आपका शेअरी मजमुआ (काव्य संग्रह) ‘ताबिशे-सुहैल’, ‘अरमुग़ाने-हरम’ और ‘कुल्लियाते-सुहैल’ के नाम से प्रकाशित हो चुका है। ‘हयाते-शिब्ली’ और ‘हक़ीक़तुर्रिबा’ आपकी नस्री तसनीफ़ात (गद्य लेखन) हैं। ‘हक़ीक़तुर्रिबा’ में आपने ब्याज की समस्या पर एक अलग नज़रिया पेश किया है। लेखक और शायर होने के अलावा आपने सियासत में भी अपना मक़ाम बनाया था। आप भारत के बंटवारे के सख़्त ख़िलाफ़ थे और 1937 में कांग्रेस के समर्थन में विधायक चुने गए, जिसमें उन्होंने मुस्लिम लीग के सय्यद अली ज़हीर को शिकस्त दी। आपको मौलाना हमीदुद्दीन फ़राही और अल्लामा शिब्ली नोमानी की सरपरस्ती का शरफ़ (गौरव) हासिल था। आप मदरसतुल-इस्लाह और शिबली कॉलेज के प्रबंधन के सक्रिय सदस्य थे। आपका इंतिक़ाल 7 नवंबर 1955 में हो गया।

300.00

SKU: Hindi-Kulliyat-Suhail Categories: , , , , Tags: , , , ,

अल्लामा सय्यद सुलैमान नदवी ने इक़बाल अहमद ख़ाँ ‘सुहैल’ के इल्म और शायरी की उत्कृष्टता पर अपने विचार व्यक्त करते हुए लिखा है—”शायर दो प्रकार के होते हैं। एक वे जो पढ़-लिखकर अपनी योग्यता के बल पर शायर बनते हैं, और दूसरे वे हैं जो माँ के पेट से शायर बनकर आते हैं। वे कुछ न भी पढ़ते तो भी शायर ही होते। पहले लोग प्रयास करके शायर बनते हैं और दूसरे क़ुदरती शायर होते हैं। अलबत्ता तालीम उनकी शायरी में चार-चाँद लगा देती है। हमारे दोस्त इक़बाल सुहैल साहब दूसरे प्रकार के शायरों में से हैं, यानी वे क़ुदरती और स्वाभाविक शायर हैं।” मौलाना मुहम्मद फ़ारूक़ ख़ाँ, क़ुरआन के हिंदी अनुवादक तथा इस्लामी विद्वान लिखते हैं — “इक़बाल अहमद ख़ाँ ‘सुहैल’ स्वभावतः एक बड़े कवि थे। उनके काव्य में बड़ी विविधता पाई जाती है। जो कुछ लिखा, सुन्दर लिखा। नबी (सल्ल.) का जो गौरवगान उन्होंने ‘मौजे-कौसर’ में किया है, वह बहुत प्रसिद्ध है।”

Weight260 g
Dimensions8.5 × 5.5 × 1 in
Binding

Paperback

Edition

First

ISBN-10

8172211279

ISBN-13

9788172211271

Language

Hindi

Pages

209

Publish Year

July 2024

Author

Iqbal Ahmad Khan

Publisher

Pharos Media & Publishing Pvt Ltd

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “कुल्लियाते-सुहैल से एक इन्तिख़ाब Kulliyat-e-Suhail se ek intekhaab (Hindi Transliteration)”