आज़ादी की लड़ाई के दौरान “भारत” का जो विचार उभरा, वह सबको साथ लेकर चलने वाला था। यह समावेशी विचार ही भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के नेताओं का मूल वैचारिक आधार था। इसके विपरीत, जो लोग ब्रिटिश शासन के अधीन थे और स्वतंत्रता आंदोलन से अलग-थलग रहे, उनके “राष्ट्रवाद” के विचार धर्म के आवरण में प्रस्तुत किए गए: मुस्लिम राष्ट्रवाद और हिंदू राष्ट्रवाद। यह सांप्रदायिक राष्ट्रवाद “दूसरे से नफ़रत” के सिद्धांत पर आधारित था। उन्होंने अपनी राजनीति को इतिहास की एक संकीर्ण समझ पर खड़ा किया। साथ ही, उन्होंने चुनिंदा घटनाओं और कुछ शासकों के कार्यों को उठाकर “दूसरे” को बदनाम करने का काम किया। जहाँ “मंदिरों का ध्वंस” और “मुस्लिम शासकों की तलवार से इस्लाम का प्रसार” जैसे विषय प्रोपेगंडे का आधार बने, वहीं विशेष रूप से औरंगज़ेब और बाबर को भारत के मुसलमानों को बदनाम करने के लिए निशाना बनाया गया। इसी प्रकार पाकिस्तान में हिंदुओं को भी नकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया और बाद में इतिहास की पुस्तकों से हटा दिया गया, जबकि भारत में मुस्लिम शासकों को बदनाम किया गया और अब उन्हें इतिहास की किताबों से हटाया जा रहा है।
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औरंगज़ेब का सच—राजनीति का अखाड़ा बनता इतिहास (Aurangzeb ka Sach)
आज़ादी की लड़ाई के दौरान “भारत” का जो विचार उभरा, वह सबको साथ लेकर चलने वाला था। यह समावेशी विचार ही भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के नेताओं का मूल वैचारिक आधार था। इसके विपरीत, जो लोग ब्रिटिश शासन के अधीन थे और स्वतंत्रता आंदोलन से अलग-थलग रहे, उनके “राष्ट्रवाद” के विचार धर्म के आवरण में प्रस्तुत किए गए: मुस्लिम राष्ट्रवाद और हिंदू राष्ट्रवाद। यह सांप्रदायिक राष्ट्रवाद “दूसरे से नफ़रत” के सिद्धांत पर आधारित था।।
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| Weight | 200 g |
|---|---|
| Binding | Paperback |
| ISBN-10 | 8172211546 |
| ISBN-13 | 9788172211547 |
| Edition | First |
| Pages | 121 |
| Publish Year | June 2026 |
| Author |
Ram Puniyani |
| Publisher |
Pharos Media & Publishing Pvt Ltd |








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